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वही

शाम वही,
शमा वही,
इंतज़ार वही,
बस तू ही नहीं |

चेहरें वही,
बातें वही,
अदायें वही,
बस तू ही नहीं |

गम वही,
मुस्कान वही,
तन्हाई वही,
बस तू ही नहीं |

दरवाजा वही,
झील का किनारा वही,
दीवारों का रंग वही,
बस तू ही नहीं |

निगाहें वही,
नाम वही,
हया वही,
बस तू ही नहीं |

उलझनें वही,
सुलझने वही,
डर वही,
बस तू ही नहीं |

महफिलें वही,
किस्से वही,
फासलें वही,
बस तू ही नहीं |

आसमां वही,
परझइयां वही,
आशीष वही,
बस तू ही नहीं |


Aashish "Joy Madhukaran"
@All right reserved 2011


अपना गम..

हमें ना वफ़ा मिली, ना बेवफाई मिली,
हम अपना गम जताए भी कैसे,
हाथों की लकीरों का लिखा मिटायें भी तो कैसे,
जो हाथ छूट गया वो भुलाएं भी कैसे,
दिल मे हे गम, लबों पेय हँसी लाये भी तो कैसे,
बेवक्त हो जाती हे आँखें नम छुपायें भी तो कैसे,
अकेलेपन से लगता हे खौफ्फ़ मुझको, नए दोस्त बनाएं भी तो कैसे!!


--
Aashish "Joy Madhukaran"
Aug 29 2006